कोटद्वार न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोटद्वार जिला पौड़ी गढ़वाल ने सरकारी पेंशन खाते से फर्जी चेकों के माध्यम से धन निकासी के मामले में आरोपी गोरलाल यादव उर्फ दीपक कुमार को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने सजा निर्धारण के दौरान आरोपी को जेल में बिताई गई अवधि का लाभ भी प्रदान किया है। सहायक अभियोजन अधिकारी विक्रांत राठौर ने बताया कि यह मामला थाना कोटद्वार क्षेत्र का है, जिसकी विवेचना नहीं इंस्पेक्टर उमेश कुमार द्वारा की गई थी। जिसमें तहसीलदार यमकेश्वर के विभागीय पेंशन खाते से फर्जी चेक तैयार कर अवैध रूप से धन निकासी की गई। जांच में सामने आया कि भारतीय स्टेट बैंक, भोगपुर शाखा से संबंधित चेक सीरीज में छेड़छाड़ कर अलग-अलग तिथियों में बड़ी धनराशि निकाली गई। चेक सीरीज संख्या 768 से जुड़े कई चेक फर्जी पाए गए, जिनके माध्यम से कुल 11 लाख 17 हजार 27 रुपये की अवैध निकासी की गई।
वादी मुकदमा द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर थाना कोटद्वार में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने बैंक अभिलेख, चेकों की प्रतियां एवं अन्य साक्ष्य एकत्र कर आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया, जिस पर अदालत द्वारा संज्ञान लिया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। साथ ही तहरीर, एफआईआर, गिरफ्तारी व बरामदगी मेमो, नमूना मोहर, जांच रिपोर्ट तथा आरोप पत्र सहित चौदह दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के बाद आरोपी का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के अंतर्गत दर्ज किया गया, जिसमें उसने आरोपों से इंकार किया।
न्यायालय ने समस्त साक्ष्यों एवं अभिलेखों का अवलोकन करने के उपरांत आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी के अंतर्गत दोषी ठहराया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि सरकारी खाते से फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से धन निकासी गंभीर आर्थिक अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है।
न्यायालय द्वारा यह निर्णय 31 जनवरी 2026 को सुनाया गया।