राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा’ का पुरस्कार वितरण: जनपद स्तर पर सोनाली, सुप्रिया और प्रीति ने मारी बाजी

डॉ. पी. द. ब. हि. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शांति कुंज हरिद्वार, उत्तराखंड के तत्वावधान में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा (सत्र 2025- 26) , नवम्बर 2025 में प्राचार्य प्रो. डी. एस. नेगी के निर्देशन में संस्कृत विभाग प्रभारी डॉ अरुणिमा एवं रसायन विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका डॉ रंजना सिंह द्वारा संपन्न कराई गई। परीक्षा में प्रतिभाग कर छात्र-छात्राओं ने अभिज्ञान और कौशल का परिचय देते हुए जनपद स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त कर महाविद्यालय को गौरवान्वित किया। परीक्षा परिणामोपरांत शांति कुंज हरिद्वार द्वारा विजयी परीक्षार्थियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह तथा नकद धनराशि प्रदान की गई।

आज महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डी. एस. नेगी ने शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा प्रदत्त पुरस्कारों को , जनपद स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त सोनाली एम. एससी. द्वितीय सेमेस्टर., द्वितीय स्थान सुप्रिया बी. एससी. चतुर्थ सेमेस्टर. तथा तृतीय स्थान प्रीति एम.एससी. चतुर्थ सेमेस्टर. को क्रमशः प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह एवं नकद धनराशि 700, 500 एवं 400 रुपए प्रदान कर आशीर्वचन एवं आगामी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की। साथ ही उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय संस्कृति केवल भारतीयों के लिए ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक है, मानव जाति का उद्गम स्थल हैऔर परंपराओं की दात्री है। संस्कृत विभाग प्रभारी डॉ.अरुणिमा मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय सस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति है जो वसुधैव कुटुंबकम् और अतिथि देवो भव के सिद्धांतों पर आधारित है। यह संस्कृति प्रेम , करुणा, दान और आध्यात्मिकता का संगम है जो मनुष्य को शुभ विचार , मंत्र और सांस्कृतिक मूल्य समझाती है।

डॉ रोशनी असवाल ने सभी विजयी प्रतिभागियों को बधाई दी साथ ही भारतीय संस्कृति के उदात्त मूल्यों को जानने हेतु प्रेरित किया ।

डॉ मनोरथ प्रसाद नौगाई ने छात्र छात्राओं को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा संस्कृत की संरक्षणता के साथ-साथ सांस्कृतिक तत्वों की विरासत को भी सहेजे हैं।

डॉ प्रियम अग्रवाल ने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया एवं उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य  वरान्निबोधत जैसे आदर्श वाक्यों पर आधारित है।

इस अवसर पर डॉ नीता भट्ट, डॉ रंजना सिंह, आदि महाविद्यालय के प्राध्यापक उपस्थित रहे ।

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