उद्यानिकी महाविद्यालय वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवम वानिकी विश्वविद्यालय की स्नातक बी एस सी चतुर्थ वर्ष की एक छात्रा जिसका नाम मधू यादव है उसकी 26 अगस्त से तबियत खराब होने के बावजूद 29 अगस्त तक महाविद्यालय की तरफ से कोई भी सही उपचार न मिलने के कारण 30 अगस्त को देहांत हो गया। विश्वविद्यालय की तरफ से कोई भी जिम्मेदारी सही से नहीं उठाई गई। जबकि समय समय पर यहां चत्रवास प्रभारी की खबर दी जा रही थी परिसर में जब से महाविद्यालय बना है तब से कोई भी एक चिकित्सक उपलब्ध नहीं है जबकि हर वर्ष बच्चो की तबियत खराब होती रही है। मधु यादव जो की पंतनगर की रहने वाली थी। उसकी 29 अगस्त को रात्रि 7:00 बजे तबियत ज्यादा खराब हुई जिस कारण उसे भरसार की औषधालय से पाबौ अस्पताल भेजा गया, जबकि व भरसार के चिकित्सक जिसका नाम संकर विष्ट है एवं अधिष्ठाता को जानकारी थी कि वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं है फिर भी मधू यादव को पाबो अस्पताल भेजा गया। हब उसका वहां उपचार किया गया किंतु उसे पाबो से पौडी अस्पताल भेजा गया वहां से जानकारी मिलि कि कोई दंत चिकित्सक उसका इलाज कर रहा था, और हमारे साथ संकर विष्ट एवं कॉलेज वाहन चालक त्रिलोक सिंह भी साथ थे।किंतु उन्होंने पाबौ चिकित्सालय में अकेले छोड दिया गया वापस चले गये, फिर मधू यादव की माता ने अधिष्ठाता महोदय से निवेदन किया कि मधू के संग उनके सहपाठी को भेजा जाय। उन्होंने नेहा रावत और अनिषा को 1:00 बजे रात्रि को अकेले छोड दिया गया उसके साथियों के भरोसे छोड़ दिया जिसमे कॉलेज से कोई स्टाफ साथ नही था न ही वार्डन डाक्टर तरु नेगी और नही भरसार की नर्स प्रीति उनके साथ कोई भी देख-रेख करने वाला नहीं था। मधू के पाबों के में उपचार के पश्चात उसे पौड़ी भेज दिया गया फिर पौडी से श्रीनगर गढ़वाल अस्पताल भेजा गया. लेकिन पौडी से श्रीनगर अस्पाताल जाने के लिए रात्रि के 2:00 बजे से 3:00 बजे तक एम्बूलेंस का इंतजार करना पड़ा, इसके पश्चात् एम्बुलेंस और असे अकेले श्रीनगर अस्पताल ले गये। जहाँ उसका उपचार एक प्रशिक्षु चिकित्सक (MBBS) के द्वारा किया गया. मधू यादव का शर्करा स्तर (236) था, फिर सुबह 9:00 बजे प्रातः उनकी माता जी श्रीनगर अस्पताल पहुंचे फिर वहां भी उन्होंने एक घंटा इंतजार किया फिर उसे ऋषिकेश एम्स अस्पताल में भेज दिया गया जाना पहुंचते ही मृत्यु हो गईं।