पहाड़ की बेटी का मुख्यमंत्री के नाम पत्र

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माननीय मुख्यमंत्री जी ….आजकल अपने सेल्फी के ट्रेंड के चलते हुए जो उत्तराखंड में नया कांसेप्ट सेल्फी विद मई विलेज निकाला है पलायन रोकने के लिए ……..वो मेरी समझ से थोड़ा परे है ….में इस दुविधा में हूँ कि आप सेल्फी के ट्रेंड को बढ़ावा देना चाहते हैं या वहां के लोगों की बदहाल जीवन को …..

मेरी समझ से सिर्फ सेल्फी ले लेने से विकास नही होगा उसके लिए तो सरकार को धरातल पर आकर काम करना ही पडेगा ,चलो हम सेल्फी ले भी लें तो क्या दिखाएं हम उस सेल्फी में मेट्रो के युग मे हमारे गावँ रोड तक नही पहुंची है ,शिक्षा का ये हाल है कि आप जाकर पता कीजिये मास्टर पांचवीं तक के सभी बच्चों को एक कमरे में बंद कर के धूप लेते है ,अस्पताल उसकी तो आप बात ही ना करे …..अगर ख़ुदा ना खस्ता किसी को शाम के बाद कुछ भी हो गया तो वो सुबह तक इंतज़ार करे क्यूंकि गावँ के आसपास तो अस्पताल दूर की बात है दूर दूर तक कहीं किसी गावँ में अस्पताल का नाम नही है ..किसी को कोई गंभीर चोट लग जाये या कुछ भी हो जाये तो इलाज के लिए कर्णप्रयाग बेस अस्पताल आने तक का जो लम्बा सफर है उसको तय करते करते तो इंसान का दूसरा जन्म भी हो जाये ……बात करे रोजगार की तो गावँ के कुछ नोजवान युवा सेना में है जो नही भर्ती हो पाए वो लास्ट में थकहार के दिल्ली का रुख कर गए …
कुदरत ने हमें देवभूमि में जन्म दिया था कोई अपनी मर्ज़ी से उस स्वर्ग की भूमि को नही छोड़ना चाहता लेकिन जब आपके पास रोजगार ना हो पढ़ाई के लिए बेहतर विकल्प ना हो गावँ तक रोड ना हो तो दिल पर पत्थर रखकर पलायन करना ही पड़ता है …..गावँ में खेतों में फसल जंगली सुंवार और भालू होने नही देते जब वहां भी खरीद के खाना है तो क्यों नही पहाड़ का आदमी दिल्ली का रुख करे…..13 जिलों के आसपास का इलाका छोड़ दिया जाए तो उत्तराखंड में विकास कम ही हुआ है सिर्फ घोषणाएं हुई है …..
Doon को स्मार्ट सिटी रहने दीजिए अपने गावँ को स्मार्ट विलेज बनाये ताकि हम भी गर्व के साथ गावँ जाकर सेल्फी ले सकें ….Doon में मेट्रो बाद में ले आना पहले अपने हर जिले के गावँ गावँ तक रोड पहुंचा दीजिये हर गावँ में बेहतर शिक्षक,अस्पताल और रोजगार दे दीजिए उत्तराखंड से पलायन खुद कम हो जाएगा

सीमा खत्री
ग्राम—-त्रिकोट
जिला—- चमोली

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