उत्तराखण्ड में बारिश के कारण नही पहुची बारात तो 19 किलोमीटर पैदल चलकर खुद दूल्हे के पास पहुंची दुल्हन

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चमोली : लंबे समय तक हुई बारिश पहाड़ के लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इसी कारण एक जगह सडक बंद होने के कारण दुल्हन लेने गयी बारात दुल्हन के घर ही नहीं पहुंच पाई। मामले दो दिन पूर्व शुक्रवार का है। जहां सुबह मदनी-चंद्रापुरी रुद्रप्रयाग से चमोली के नारायणबगड़ के भुल्याड़ा (कौब) गांव बरात जानी थी। ये बारात निकली तो थी दुल्हन लेने, जिसे शाम को वापस लौटना था, लेकिन रास्ते में दो जगहों पर हाइवे बंद होने से शनिवार को भी बरात भुल्याड़ा दुल्हन के गांव नहीं पहुंच पाई।इस दौरान बरातियों ने वाहनों में ही भूखे-प्यासे रात गुजारी और शनिवार दोपहर बाद एक तरफ हाइवे खुलने पर कर्णप्रयाग की तरफ लौटने लगें। देर शाम दूसरी ओर से भी हाइवे खुल गया तो भुल्याड़ा से दुल्हन के साथ 10-12 परिजन 19 किलोमीटर पैदल चलकर कर्णप्रयाग पहुंचे और फिर वहीं शादी की रश्में संपन्न कराई गयी।
भुल्याड़ा निवासी सुपिया लाल की बेटी कविता की शादी मदनी-चंद्रापुरी निवासी गोकुल लाल के पुत्र चंद्रशेखर के साथ तय थी। अगस्त्यमुनि से बरात शुक्रवार सुबह भुल्याड़ा के लिए रवाना हुई। लेकिन, इसी बीच कर्णप्रयाग-ग्वालदम हाइवे भारी भूस्खलन के कारण आमसौड़ में बंद हो गया। यहां से भुल्याड़ा की दूरी 19 किमी है।यह स्थिति देख दूल्हे को पैदल ही भुल्याड़ा भेजने की रणनीति बनी, लेकिन आमसौड़ के पास हाइवे पर एक भारी-भरकम चट्टान ने राह रोक ली। यहां पहाड़ी से लगातार पत्थर भी गिर रहे थे। कौब के प्रधान लक्ष्मण कुमार ने बताया कि बरातियों को शाम तक हाइवे खुलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।
इस बीच आमसौड़ से पांच किमी दूर कर्णप्रयाग की ओर शिव मंदिर के पास भी भूस्खलन होने से हाइवे बंद हो गया। ऐसे में बराती कर्णप्रयाग भी नहीं लौट पाए और उन्होंने वहीं जंगल के बीच वाहनों में ही रात गुजारी। इतना ही नहीं शनिवार को भी दोपहर तक हाइवे नहीं खुल पाया।

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